समुद्र पार चोल नौसेना: राजेंद्र चोल का श्रीविजय अभियान
लगभग 1025 में राजेंद्र चोल प्रथम ने बंगाल की खाड़ी के पार नौसेना भेजी। निशाना था मलक्का जलडमरूमध्य पर क़ाबिज़ श्रीविजय।
लगभग 1025 में चोल सम्राट राजेंद्र प्रथम ने बंगाल की खाड़ी के पार एक नौसेना भेजी। उसका निशाना सुमात्रा के पालेमबांग में केंद्रित श्रीविजय साम्राज्य था। हिंद महासागर के व्यापार को चीन से जोड़ने वाला मलक्का जलडमरूमध्य सदियों तक श्रीविजय के क़ब्ज़े में रहा।
दोस्त पर ही हमला क्यों?
दोनों समुद्री ताक़तें पहले दोस्त थीं। आज नीदरलैंड्स के लाइडन में रखे ताम्रपत्रों के मुताबिक़, श्रीविजय के एक राजा ने नागपट्टिनम में चूड़ामणि विहार नाम का बौद्ध विहार बनवाया, और राजराज प्रथम ने उसके ख़र्च के लिए एक गाँव दान किया। फिर हमला क्यों? कोई भी स्रोत सीधे वजह नहीं बताता। इतिहासकार अंदाज़ा लगाते हैं: व्यापार मार्ग पर नियंत्रण, तमिल व्यापारियों पर चुंगी, या चीन के साथ कूटनीतिक होड़।

शिलालेखों में अभियान
राजेंद्र की मेय्कीर्ति, यानी मंदिरों की दीवारों पर खुदी राजप्रशस्ति, उन जगहों की सूची देती है जहाँ नौसेना ने हमला किया। उनमें आज के मलेशिया का केडाह, यानी कडारम, शामिल है। इसी से राजेंद्र को ‘कडारम कोंडान’ की उपाधि मिली। वह यह भी कहती है कि श्रीविजय के राजा संग्राम विजयोत्तुंगवर्मन को बंदी बनाया गया। दिलचस्प बात यह है कि उस राजा का नाम हमें दुश्मन की इसी डींग से पता चलता है।
एक हमला एक साम्राज्य नहीं होता: चोलों ने दक्षिण-पूर्व एशिया पर राज किया, इसका कोई प्रमाण नहीं।
उसके बाद
श्रीविजय में चोलों के स्थायी शासन का कोई प्रमाण नहीं है। पर व्यापार नहीं रुका: 1088 में सुमात्रा के बारूस में एक तमिल व्यापारी संघ ने शिलालेख लगवाया। सदियों बाद लिखे गए मलय ग्रंथ ‘सेजारा मेलायु’ के ‘राजा चुलान’ नाम के भारतीय राजा की तुलना कुछ लोग राजेंद्र से करते हैं, पर वह किंवदंती है।

समयरेखा
- ~1006नागपट्टिनम के चूड़ामणि विहार को राजराज प्रथम का ग्राम दान (लाइडन ताम्रपत्र)।
- ~1014राजेंद्र चोल प्रथम गद्दी पर बैठे।
- ~1025श्रीविजय पर समुद्र पार हमला; 'कडारम कोंडान' की उपाधि।
- 1044राजेंद्र के शासन का अंत।
- 1088सुमात्रा के बारूस में तमिल व्यापारी संघ का शिलालेख।
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स्रोत
मूल स्रोत
- , South Indian Inscriptions, Vol. II: Tamil Inscriptions of Rajaraja, Rajendra Chola and Others in the Rajarajesvara Temple at Tanjavur. Archaeological Survey of India, Madras, 1891–1913. मुफ़्त में पढ़ें
- , The Larger Leiden Plates (of Rajaraja I). Epigraphia Indica, Vol. XXII, 1933–34.
शोध और अध्ययन
- , Nagapattinam to Suvarnadwipa: Reflections on the Chola Naval Expeditions to Southeast Asia. Institute of Southeast Asian Studies, Singapore, 2009.
- , The Cōḷas. University of Madras, 1955 (2nd ed.).
- , The Tamil merchant-guild inscription at Barus: a rediscovery. In Claude Guillot (ed.), Histoire de Barus, Association Archipel, Paris, 1998.