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तमिलनाडु

कावेरी की मिट्टी से साम्राज्य बनाने वाले चोल

पानी, धान, ग्राम सभाएँ, मंदिर और समुद्री व्यापार: चोलों की ताक़त कैसे बढ़ी।

कावेरी नदी पर बना कल्लणै (ग्रैंड एनिकट)।
कावेरी नदी पर बना कल्लणै (ग्रैंड एनिकट)। चित्र: Thangaraj Kumaravel, CC BY 2.0

चोलों की ताक़त की जड़ कावेरी डेल्टा थी। तंजावुर के आसपास का यह उपजाऊ मैदान अपनी नहरों की वजह से दक्षिण भारत के सबसे समृद्ध धान क्षेत्रों में से एक बन गया।

कावेरी का वरदान

कावेरी पर बने प्राचीन पत्थर के बाँध कल्लणै को, परंपरा के अनुसार, शुरुआती चोल राजा करिकाल ने बनवाया था। सदियों की मरम्मत के साथ यह आज भी काम कर रहा है।

तंजावुर पर क़ब्ज़ा

लगभग 850 में विजयालय ने तंजावुर जीता। यहीं से मध्यकालीन चोलों की कहानी शुरू होती है। राजपरिवार के भीतर टकराव भी थे: युवराज आदित्य करिकाल की हत्या और उसके बाद की सज़ा उडैयारगुडी शिलालेख में दर्ज है।

तंजावुर ज़िले के दारासुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर, बाद के चोल काल का।
तंजावुर ज़िले के दारासुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर, बाद के चोल काल का। चित्र: KARTY JazZ, CC BY-SA 4.0

वोट डालने वाले गाँव

गाँवों में सभाएँ होती थीं: आम गाँवों में ‘ऊर’, और ब्राह्मणों को दान में दिए गए गाँवों में ‘सभा’। 919 और 921 के उत्तरमेरूर शिलालेख बताते हैं कि समिति के सदस्य कुडवोलै पद्धति से, यानी घड़े से ताड़पत्र की पर्चियाँ निकालकर, चुने जाते थे।

बैंक बना मंदिर, समुद्र पार पहुँचा धान

विधवा रानी सेंबियन महादेवी ने ईंट के मंदिरों को पत्थर में फिर से बनवाया। राजराज प्रथम ने नाडुओं के ऊपर ‘वलनाडु’ नाम के बड़े प्रशासनिक हिस्से बनाए, और लगभग 1010 में तंजावुर का महामंदिर पूरा किया। वह मंदिर क़र्ज़ देता था और हिसाब रखता था। उनके बेटे राजेंद्र की नौसेना समुद्र पार श्रीविजय तक पहुँची।

नीलकंठ शास्त्री ने चोल शासन को केंद्रीकृत बताया; बर्टन स्टाइन ने तर्क दिया कि यह ढीला-ढाला ‘खंडित राज्य’ था। यह बहस आज भी जारी है।

'उत्तम' नाम वाला चोल सिक्का।
'उत्तम' नाम वाला चोल सिक्का। चित्र: Jean-Michel Moullec, CC BY 2.0

समयरेखा

  1. ~200परंपरा के अनुसार करिकाल चोल का कल्लणै।
  2. ~850विजयालय ने तंजावुर जीता।
  3. 919उत्तरमेरूर शिलालेख: कुडवोलै चुनाव।
  4. ~1010तंजावुर का महामंदिर।
  5. ~1025राजेंद्र का समुद्र पार अभियान।

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स्रोत

मूल स्रोत

  1. K. A. Nilakanta Sastri, Studies in Cola History and Administration (includes the Uttaramerur assembly inscriptions). University of Madras, 1932. मुफ़्त में पढ़ें

शोध और अध्ययन

  1. Burton Stein, Peasant State and Society in Medieval South India. Oxford University Press, Delhi, 1980. मुफ़्त में पढ़ें
  2. Noboru Karashima (ed.), A Concise History of South India: Issues and Interpretations. Oxford University Press, New Delhi, 2014.
  3. Noboru Karashima, South Indian History and Society: Studies from Inscriptions, AD 850–1800. Oxford University Press, Delhi, 1984.
  4. Y. Subbarayalu, Political Geography of the Chola Country. State Department of Archaeology, Madras, 1973.
  5. K. A. Nilakanta Sastri, The Cōḷas. University of Madras, 1955 (2nd ed.).

आधिकारिक स्रोत

  1. UNESCO World Heritage Centre, Great Living Chola Temples (Thanjavur, Gangaikondacholapuram, Darasuram). मुफ़्त में पढ़ें