हम्पी से मैसूरु तक: शाही दशहरे का असली रिश्ता क्या है?
कहा जाता है कि मैसूरु दशहरे की जड़ विजयनगर की महानवमी में है। दस्तावेज़ असल में क्या दिखाते हैं?

अक्सर कहा जाता है कि मैसूरु दशहरे की जड़ें विजयनगर के राजाओं के महानवमी उत्सव में हैं। हम्पी के मंच से, विदेशी यात्रियों के लेखों से होते हुए 1610 के श्रीरंगपट्टण तक सबूतों का पीछा करें, तो साफ़ होता है कि क्या दर्ज है और क्या बाद की दरबारी परंपरा।
हम्पी का मंच
हम्पी के शाही केंद्र में महानवमी डिब्बा सीढ़ीदार परतों वाला विशाल पत्थर का मंच है। इसे चरणों में बनाया गया, और आमतौर पर शाही उत्सवों से जोड़ा जाता है।
यात्रियों ने क्या देखा
1443 में आए फ़ारसी दूत अब्दुर रज़्ज़ाक़ ने एक शाही उत्सव का वर्णन किया। इसे आमतौर पर महानवमी माना जाता है, हालाँकि इस पर मतभेद हैं। लगभग 1520 में आए पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पाइस ने नौ दिन के उत्सव को दिन-ब-दिन लिखा। उत्सव में राजा जिस इमारत में बैठते थे, उसे उन्होंने ‘विजय का घर’ कहा। कई विद्वान मानते हैं कि यही हम्पी का मंच है, पर यह साबित नहीं हुआ है।

श्रीरंगपट्टण, 1610
1565 के बाद हम्पी राजधानी नहीं रहा। वोडेयार दरबार की परंपरा के अनुसार, 1610 में श्रीरंगपट्टण जीतने वाले मैसूरु के राजा वोडेयार ने वहाँ यह उत्सव शाही ठाठ से मनाया।
मैसूरु की परंपरा
आज भी वोडेयार परिवार महल के भीतर निजी दरबार लगाता है। दसवें दिन, विजयादशमी पर, जंबू सवारी निकलती है और सोने का हौदा मैसूरु की सड़कों से गुज़रता है। 1970 के दशक में राज्य सरकार ने सार्वजनिक उत्सव अपने हाथ में लिया, तब से हौदे में चामुंडेश्वरी देवी की मूर्ति निकलती है।
हम्पी और मैसूरु का रिश्ता एक संभावित परंपरा है; दस्तावेज़ों में ज़्यादा साफ़ दिखती है वोडेयार दरबार की निरंतरता।

समयरेखा
- 1443फ़ारसी दूत अब्दुर रज़्ज़ाक़ ने विजयनगर के शाही उत्सव का वर्णन किया।
- ~1520पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पाइस ने नौ दिन के उत्सव को दिन-ब-दिन लिखा।
- 1565तालीकोटा का युद्ध; हम्पी राजधानी नहीं रहा।
- 1610राजा वोडेयार ने श्रीरंगपट्टण में शाही ठाठ से उत्सव मनाया।
- 1970sसार्वजनिक दशहरा राज्य सरकार ने अपने हाथ में लिया।
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स्रोत
मूल स्रोत
- , A Forgotten Empire (Vijayanagar): includes Domingo Paes's account of the Mahanavami festival. Swan Sonnenschein, London, 1900. मुफ़्त में पढ़ें
- , India in the Fifteenth Century: includes the narrative of Abd-er-Razzak. Hakluyt Society, London, 1857. मुफ़्त में पढ़ें
शोध और अध्ययन
- , Mahānavamī: Medieval and Modern Kingly Ritual in South India. In Bardwell L. Smith (ed.), Essays on Gupta Culture, Motilal Banarsidass, Delhi, 1983.
- , Devotional Sovereignty: Kingship and Religion in India. Oxford University Press, New York, 2020.
आधिकारिक स्रोत
- , Group of Monuments at Hampi. मुफ़्त में पढ़ें
- , Utsav: Srirangapattana Dasara. मुफ़्त में पढ़ें